
मै अपने ही कमेंट पर टिप्पणी करते हुए कह रहा हू बात कुछ भी करे कोई भी बहाना बनाए पर गलती हमारी ही है। हम बहुत ही स्वार्थी लोग है, खुद की गलती मानने से बचते है, हमे लगता है कि यही अहंकार है जो जानता है कि गलती हो रही है और उससे कामना की पूर्ति हो रही है तो वो अपनी गलती को मानना नहीं चाहता, और ये भी चाहता है कि कामना की पूर्ति होता रहे। बीस तरह के बहाने बनाते है कि मैं सही उद्देश्य से फोन लेता हू पर ये हो जाता है वो हो जाता है। वास्तव में अंदर ही अंदर से हम चाह रहें होते है, कि किसी भी तरह से हमारी कामना की पूर्ति होती रहे। अगर ऐसा नहीं चाह रहे होते तो जिस उद्देश्य से ले रहे है उस उद्देश्य के पूरा होने के बाद हम उसे रख भी तो सकते है। इसमें पूरी तरह से हमारी ही कामना छुपी रहती है। बस और कुछ नहीं है


















