
Kamini yadav
हा हम भी k. के जैसे जीते हैं बिना किसी बात को जाने बगैर उसी के जैसे चुप चाप बस अपना काम करते हैं लेकिन जो हम कर रहे हैं क्या वो सही कर रहे हैं या नहीं ये भी नहीं सोचते क्यों कर रहे हैं क्या हो रहा है ये भी नहीं ।
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हा हम भी k. के जैसे जीते हैं बिना किसी बात को जाने बगैर उसी के जैसे चुप चाप बस अपना काम करते हैं लेकिन जो हम कर रहे हैं क्या वो सही कर रहे हैं या नहीं ये भी नहीं सोचते क्यों कर रहे हैं क्या हो रहा है ये भी नहीं ।
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