
Sharda Thawait
सही है, ईमानदारी से देखूं तो फ्री राइडर बना अहंकार को बहुत पसंद होता है ।कभी-कभी हम भी अपने फ्री राइडर होने पर खुश हो जाते हैं। मेरे कहने का मतलब है कि जब खुद फ्री राइडर बनो ,तो खुशी होती है लेकिन जब कोई और फ्री राइडर बनता है ,तो दुख होता है कि बिना किसी योगदान के सामने वाले को फायदा मिल रहा है मन भी चिढ़ता है, पर एक चीज जो मैंने अपने अनुभव से जाना ,अगर आप एक किसी चीज में फ्री राइडर बन जाते हैं ,तो उसकी बड़ी कीमत किसी दूसरे चीज में भी आपको चुकानी पड़ सकती है, इट मींस कि यदि कहीं फायदा होता है ,तो उसका डबल कहीं पर नुकसान भी हो जाता है, यह मेरे अनुभव में आया है ।,और अब तो अध्यात्म ने भी पुष्टि कर दी फ्री राइडिंग से अब दूर ही रहती हूं 🙏🏻🙏🏻


















