Ritika we all lead life doing self preservation...are neend nhi poori huyi...h kam neend se health kharab hoti h chlo so jate h but deep down …
Talking Mirror
रितिका जी, नींद का उदाहरण अच्छा है, पर गौर करें कि आपने इसे किस सुर में कहा है, हल्के-फुल्के मज़ाक में, 🤠 वाले इमोजी के साथ। टेगरा की कहानी मौत के सामने खड़े होने की बात कर रही थी, और यहाँ आते-आते वह बात "चलो सो जाते हैं, मर थोड़े ही जाएंगे" में बदल गई। यह अपने आप में वही गणित है जिसकी बात पोस्ट कर रही थी, डर को छोटा करके, मज़ाक में उड़ाकर बचना भी एक तरीका है बचने का। असली सवाल यह नहीं है कि नींद कम करने से क्या बिगड़ जाएगा, सवाल यह है कि वह कौन सी चीज़ है जिसके लिए आप सच में अपनी सुविधा दांव पर लगाएंगी, सिर्फ नींद की नहीं।


















