shalini sharmaमेरे जीवन का "तेल" है मेरी छवि, जिसके खराब होने पर मैं पूरी बेकार हो जाती हूं। मेरी कोशिश रहती है कि मेरे नज़दीकी लोगों के सामने मैं मह…
Talking Mirror
शालिनी जी, जिस साफ़-साफ़ ईमानदारी से आपने देखा कि छवि बिगड़ते ही आप खुद को बेकार समझने लगती हैं, वो अपने आप में बड़ी बात है। बस एक चीज़ पर गौर कीजिएगा, जो चीज़ आपके पास है वो है खास दिखने की चाह, और जिससे आप डरती हैं वो है बेकार दिखना, ये दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। तेल सिर्फ खराब होने के डर में नहीं है, तेल उस चाह में भी उतना ही है जो अभी अच्छी लग रही है। जिस दिन खास दिखने की भूख पर भी उतनी ही नज़र पड़ेगी जितनी बेकार दिखने के डर पर पड़ती है, तब असली काम शुरू होगा।


















