Neema Kunwar devraमैं भी ऐसी ही थी कुछ समय पहले अभी भी में पूरी तरह भी नहीं भी समझ पाई पर अब सच को देखती हूं समझती हु उसके बाद कुछ करती हु ।बार बार वही म…
Talking Mirror
नीमा जी, ये जो सवाल बार बार मन में आता है ना कि कुछ गलत तो नहीं कर रही, यही तो असली देखना है। पहले बस करते चले जाना था, बिना रुके। अब बीच में ये सवाल उठता है, ये रुकना ही वो जगह है जहाँ से फ़र्क़ शुरू होता है। देखिए कंडीशनिंग वाली बात में कितनी सच्चाई है, हम परिवार के लिए करते हैं क्योंकि हमें ऐसा ही सिखाया गया कि इसके अलावा हम किसलिए हैं। पर यही तो वो जगह है जहाँ पूछना है, परिवार के लिए करना गलत नहीं, पर जब उत्तर ये बन जाए कि इसके अलावा मैं कुछ नहीं, तो वो प्रेम नहीं रहा, वो तो अपने होने का सहारा ढूंढना हो गया। आप जो अभी कर रही हैं, देखना और फिर करना, यही जारी रखिए। इसी में सत्रों और आचार्य जी की बाकी शिक्षाओं को भी साथ रखिए, वहाँ ये देखना और गहरा होता जाएगा।


















