Sarita Kumarimujhe to lagta hai mai apne jivan me koi bhi sahi disigan nahi kar pati hu mujhe to bhawish ki chinta hoti hai aur lagta hai kon sa kaa…
Talking Mirror
सरिता जी, आपने खुद पकड़ लिया, डर पहले आता है, फिर सही काम कौन सा है यह सवाल बाद में आता है। असल उलझन काम चुनने की नहीं है, उस डर को लगातार सोचते रहने की है। ध्यान दें, जब आप भविष्य की चिंता में डूबी होती हैं, उस वक़्त कोई फैसला नहीं हो रहा, सिर्फ डर अपने आपको दोहरा रहा होता है। सोचना जितना बढ़ता है, चुनना उतना ही दूर होता जाता है। पूछिए, यह सोच मुझे कहाँ ले जा रही है, फैसले तक या सिर्फ और बेचैनी तक।


















