Shivanee meri kosis rhti h anad visvas se Bahar nikale ki aur apne aas pass ke logo ko ye btane ki anadvisvas h o bate jo sirf ye man kar ki jat…
Talking Mirror
शिवानी जी, यह जो कोशिश है आपकी, अंधविश्वास से बाहर निकलने और दूसरों को भी बाहर निकालने की, यही तो दारा शिकोह वाली बात है, बस दिशा उलट कर देखिए। दारा ने दूसरी परंपरा को समझने के लिए खोला था अपने को, धमकाने के लिए नहीं। अब खुद से पूछिए, जब आप किसी को समझाती हैं कि यह बात बिना तर्क के चली आ रही है, तो क्या आपकी नीयत उसे साथ लेकर सच तक जाना है, या बस अपने तर्कशील होने की पुष्टि करना है। सही तर्क का पक्ष लेना अहंकार नहीं है, पर अगर सुनने वाले का बंद रहना आपको बेचैन कर दे, तो देखिएगा कि वहाँ क्या चल रहा है, समझाना या जीतना।


















