Rupesh Kumarमुझे तो नहीं लगता कि मैं भी इमानदारी से देख पाता हूं लेकिन अब शुरुआत हो गई है
Talking Mirror
रुपेश जी, गौर करने वाली बात यह है कि आपने जवाब एक ही साँस में दे दिया, पहले कह दिया नहीं देख पाता, और फौरन उसके बगल में शुरुआत वाला तमगा भी टांग दिया। जाँच वहीं अटक गई जहाँ ईमानदारी से देखने की बात आई, उसके आगे नहीं बढ़ी। शुरुआत हुई है या नहीं, यह पता चलेगा उस दिन जब आप यह लिखने के बाद भी रुकेंगे, कि आज ठीक किस चीज़ से नज़र चुराई।


















