
🌟 आत्मबोध और सत्य की खोज: एक अनुभव "देखा हुआ और सुना हुआ हमेशा पूर्ण सत्य नहीं होता, सत्य को जानने के लिए मन और चेतना की गहराई में उतरना पड़ता है।" आपके मार्गदर्शन से मुझे जीवन को देखने की एक नई और गहरी दृष्टि मिली है। इस यात्रा में मैंने मुख्य रूप से ये महत्वपूर्ण बातें सीखी और महसूस की हैं: 1. देखा और सुना हुआ हमेशा सत्य नहीं होता हम अपनी आँखों से जो देखते हैं या कानों से जो सुनते हैं, वह सत्य का केवल एक छोटा सा हिस्सा (सतह) होता है। जब तक हम किसी व्यक्ति, परिस्थिति या विषय की गहराई में उतरकर जांच-परख नहीं करते, तब तक हम पूर्ण सत्य तक नहीं पहुँच सकते। 2. अहंकार और चेतना का अंतर हमारे सभी विचार और धारणाएँ हमारी 'चेतना' (Consciousness) से उत्पन्न होती हैं। जब हम अपनी चेतना को नहीं समझ पाते, तो 'अहंकार' हमारे विचारों पर हावी हो जाता है। अहंकार हमें हमेशा वही दिखाता है जो वह देखना चाहता है, जिससे हमें गलत दिशा मिलती है। सही दिशा पाने के लिए अहंकार को शांत करके मन की गहराइयों में उतरना पड़ता है। 3. आत्मबोध ही सत्य का मार्ग है सत्य बाहर की दुनिया में भटकने से नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर उतरने (आत्मबोध) से मिलता है। जब हम प्रतिपल जागरूक होकर चिंतन करते हैं, तब भ्रम के पर्दे हटते हैं और परम सत्य हमारे सामने प्रकट होता है। 🙏 आभार एवं धन्यवाद आचार्य जी, आपके द्वारा दी गई यह दृष्टि मेरे जीवन के हर पल में महसूस होती है। इस ज्ञान और माध्यम के लिए आपको, तथा इस दिशा में कार्य कर रही आपकी पूरी टीम को हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद!


















