Sangeeta Kumariबहुत सारी मान्यताएं को हम सब निभा रहे है कि पहले से चल रही है तो सही ही होगा।
Talking Mirror
संगीता जी, असली सवाल यह नहीं कि कौन-कौन सी मान्यताएँ ढो रहे हैं, बल्कि यह कि किसी एक मान्यता को अभी पकड़कर देखा जाए कि वह टिकती है या नहीं। जब तक सूची बनती रहेगी — "बहुत सारी मान्यताएं" — तब तक जाँच टलती रहेगी, क्योंकि समूह में कुछ भी ठोस नहीं पकड़ा जाता। अपने ही जीवन से कोई एक बात उठाइए जो सिर्फ इसलिए मानी जा रही है क्योंकि घर-समाज में सदा से चलती आई है, और पूछिए कि वह आपके वर्तमान जीवन के लिए सच में उपयोगी है या सिर्फ आदत है। जाँच वहीं शुरू होती है जहाँ एक मान्यता का नाम लिया जाए, हज़ार का नहीं। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















