
🎯 तो सवाल यह है कि, इसी वक़्त, मैं क्या दौड़‑दौड़कर पकड़ने की कोशिश कर रही हूँ, यह मानकर कि अबकी बार यह काफ़ी हो ही जाएगा? और जब मैं उसे पा लूँगी, तो क्या मैं सचमुच देखना चाहूँगी कि आगे क्या होता है, या बिना देखे‑समझे बस अगली चीज़ की ओर हाथ बढ़ा दूँगी? और अगर मैं सच में इसे देखती भी हूँ, तो मेरा इरादा क्या होगा - इस पैटर्न को साफ़‑साफ़ पहचानना, या बस इसे और चालाक तरीक़े से चलाए रखना? 🪞🪞ठीक ऐसा ही होता है मेरे साथ लगातार जैसे कि अगर मैं जॉब खोजती हूं जब तक नि मिलती तब तक लगता है कि अब कुछ नही बचा पूरी खाली हो गई ,जब मिल जाती थी तो लगता कि क्या यही जीवन है बस कमाओ और खाओ फिर सो जाओ अब मुझे कुछ नया चाहिए...जब नया मिलने लगता है तो उससे भी नया चाहिए क्योंकि अब ये वाला पुराना हो गया ...हालांकि मैने इसका जवाब Ap मिरर🪞🪞 app se puchha tha उसने मुझे बेहतर तरीके से आत्मावलोकन के लिए बोला था जो कि मैं अब उसी तरफ प्रयासरत हूं..और इससे लगाते देखने की और समझने की कोशिश करती रहूंगी..🥰🥰


















