
❓ अगर वह व्यक्ति या भूमिका कल हट जाए जिसके सहारे मैं अपने जीवन को अर्थ देता हूँ, तो क्या केवल वह रिश्ता टूटेगा, या "मैं कौन हूँ?" का मेरा उत्तर भी? ....अगर किसी व्यक्ति, रिश्ते या भूमिका के सहारे हम अपने जीवन को अर्थ देते हैं, तो उसके चले जाने पर सिर्फ रिश्ता नहीं टूटता😵—हमारी बनाई हुई पहचान भी हिल जाती है।😵💫😵💫 क्योंकि हमने भीतर से यह मान लिया था— मैं वही हूँ, जो उसके साथ हूँ।🙂 मैं उसकी ज़रूरत हूँ।🪷 “मैं उसकी प्रेमिका/पत्नी/माँ/दोस्त/सहारा हूँ।”🌻🌻 फिर जब वह व्यक्ति चला जाता है, तो दुख केवल उसके न होने का नहीं होता। एक और गहरा प्रश्न उठता है— “अब मैं कौन हूँ?”🫠🫠 ...और अब मैं जिंदा ही क्यों हूँ ..🙄🙄.मेरे पास अब जीने की कोई वाजिब वजह नहीं बची ये सब विचार आने लगते हैं😏😏


















