
12 सितंबर को गोवा में Weekend With Master शिविर के दौरान आचार्य जी के साथ अष्टावक्र गीता के श्लोक 15.3 पर एक गहन सत्र हुआ। 12-13-14 सितंबर के इस शिविर में देशभर से लोग उपस्थित थे। सत्र से पहले लोगों ने साथ मिलकर भजन गाये और नृत्य भी किया। सत्र में आचार्य जी ने समझाया कि हम अक्सर बदलाव इसलिए चाहते हैं ताकि हमारी पुरानी कामनाएँ और ज़्यादा आसानी से पूरी हो सकें, लेकिन वास्तविक ज्ञान हमें बदलता है - हमारी कामनाओं की सेवा नहीं करता। आचार्य जी ने बताया कि जिनका लक्ष्य भोग है, वे तत्वज्ञान का त्याग कर देते हैं, क्योंकि सच्चा ज्ञान जीवन की पुरानी दिशा और उसके पीछे खड़े अहंकार पर ही सवाल उठा देता है। ज्ञान का काम हमारे पुराने लक्ष्यों को पूरा करने में हमारी मदद करना नहीं, बल्कि यह दिखाना है कि क्या करने लायक है और क्या छोड़ने लायक है। सितंबर में गोवा में हर वीकेंड Weekend With Master शिविर आयोजित हो रहे हैं, जिनमें HIDP की कुछ रोचक ऐक्टिविटीज़, भजन गायन और नृत्य भी हो रहे हैं। अक्टूबर में आचार्य जी दिल्ली-एनसीआर लौटेंगे, जहाँ Weekend With Master शिविर जारी रहेंगे।


















