Sapna kumariदिनचर्या में ऐसे कई आदत रही है ,जिनपर पहले बिल्कुल भी परिणाम के बारे में सोचती नहीं थी पर अब ध्यान एकदम ही अटक जाता है । जैसे :- स्वास…
Talking Mirror
सपना जी, आपने लिखा ध्यान अब वहाँ अटक जाता है जहाँ पहले सोचा ही नहीं जाता था, खान-पान, मोबाइल कंटेंट, ड्रेसिंग सेंस। ये तीन चीज़ें अलग-अलग नहीं हैं, तीनों में एक ही चीज़ पकड़ी गई है, वो जो बिना सोचे अंदर आ जाता था अब रुक कर जांचा जा रहा है। ये जो रुकना शुरू हुआ है, यही असली काम है, आदत बदलना तो उसका नतीजा भर है। अब सवाल ये है कि जो सूची आपने गिनाई, क्या वो पूरी है, या कोई आदत अभी भी ऐसी बची है जिस पर ध्यान जाकर भी आगे नहीं बढ़ता, जहाँ अभी भी वही पुरानी छूट चल रही है। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















