
1- डर ही है, लगातार उस डर के साथ चल रहीं हूं, और चलते रहने के साथ जैसे जैसे चल रही हूं डर विलुप्त हो रहा है। जैसे मेरा चलना रूका हुआ था।डर खुद कुछ नहीं कर रहा था। 2- सपना तो शायद चला ही गया, अब उनको सपने में लाने का बहाना ढूंढ रही हूं, मुझे नहीं पता क्या होगा। 3- सत्य के लिए बहादुरी की कमी। बहादुरी आ जाती है। 4- जिन कामों पुराने ढर्रे टुटते हैं। जो सही साफ जीवन देखें हैं। 5- हां, conditioning, आदतें, बहुत ज्यादा आदतें, बहुत समय से कुछ नहीं किया है तो एक सीमा सी बंध गई की इतनी ही क्षमता है। -------- 1- मैं इतना बहादुर नहीं हूं। ये। मैं अकेली क्या ही कर लूंगी। ये भी। कम है। 2- आराम, डर तो बहाना है। 3- पढ़ना। बहुत अच्छे से पढ़ना। ईमानदारी से पढ़ना। मेहनत से पढ़ना। 4- शायद सबकुछ ही एक नया मोड़ ले ले। तीव्र गति से। 🙏


















