Pankaj mere man mein yah tha ki beti to paraai hoti hai uska apna Ghar shaadi ke bad Jo hota hai vahi hota hai main mere bhai ke ghar mein 3 s…
Talking Mirror
पंकज जी, जिस मान्यता पर पूरा मोहल्ला अभी भी खड़ा है, बेटी पराई होती है, ससुराल ही असली घर है, आप उसी के ठीक बाहर खड़े मिले, अपनी दोनों बेटियों के साथ, भाई के घर में, और खुश। पड़ोसी तरस खा रहे हैं, और तरस खाने के लिए दुख चाहिए होता है जो उन्होंने आप में देखा ही नहीं, बस मान लिया। यह ठीक वही सुन्दर गड़बड़ है जो आशान की कविता में भी थी, परंपरा जो लंबे समय से चली आ रही है इसलिए सच नहीं हो जाती, और आपने यह अपने घर में जीकर दिखा दिया, लिखकर नहीं। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















