
पुरुष महिला को उससे आगे बढ़ते नहीं देखना चाहता, क्योंकि पुरुष को ऐसा लगता है, महिला अगर बाहर काम करने लग गई तो, ओ मेरी बात नहीं मानेगी, अपना दर्जा मुझसे ऊपर बना लेगी।ओ आजाद पंछी होकर उड़ने लगेगी, यही सोच पुरुष की ज्यादातर महिलाओ को घर में चार दीवारी मे ही कैद करके रखती हैं। अब भी भारत में ऐसी बहुत सी महिलाएं हैं,जो बाहर काम करना चाहती तो है, मगर उनके पति नहीं भेजते, इसी डर के कारण कि स्त्री अगर बाहर जाकर कमाने लगे तो, सशक्त बन जाएगी और पुरुष को कम आंकने लग जाएगी, यही मानसिकता पुरुष की होती हैं। और दूसरी ओर देखे तो, कुछ महिलाएं ऐसी भी है, जो खुद ही बाहर कमाना नहीं चाहती, क्योंकि उन्हें लगता है, पुरुष कमाकर हमे पालते हैं, सब शौक पूरे करते हैं, सुरक्षा मिल रही है, घर में ही रहना उन्हें ज्यादा उचित लगता है, फिर ओ पुरुष पर निर्भर हो जाती हैं, पुरुष फिर जो चाहे सितम ढाए, सब सह लेती है, क्योंकि ओ महिलाएं घर से बाहर नहीं निकलना चाहती, उन्हें घर में ही सुरक्षित, ऐशो आराम महसूस होता है। वे संघर्ष करनेसे बचती है, और चार दीवारी में कैद रहना चाहती है। और फिर पुरुष वर्ग उन्हें अपने उपभोग की वस्तु की तरह उपयोग करता है। बस बिस्तर गरम कर और स्वादिष्ट खाना बना,2,4, बच्चे पैदा कर उन्हें भी संभाल, यही औकात है, पुरुष की नजर में स्त्री की। मूढ़ होती है ओ महिलाएं जो यह सब अन्याय सह लेती हैं। और इसे एक पत्नी, एक मा की जिम्मेदारी,और कर्तव्य मान लेती है।😡 हर महिला को आत्मनिर्भर बनना होगा, ताकि कोई उसे गुलाम ना बना सके, चार दीवारी में कैद ना कर सके। उसके लिए आत्मज्ञान की ज्यादा जरूरत है, गीता की सबसे ज्यादा जरूरत है।🙏


















