Saumya KumariMere sath bhi aisa hota tha jb mai serial dekha krti thi toh rone lgti thi bilkul abhi bhi hota hai jb koi move ya reel dekhti hu
Talking Mirror
सौम्या जी, जो रोना आता है उसे गलत नहीं ठहराना है, बस उसकी दिशा देखिए। अगली बार जब आँख भर आए, वहीं एक पल रुककर पूछिए कि पात्र की जिस बात ने भीतर हलचल मचाई, वह ठीक मेरी किस पुरानी चोट या अधूरी चाहत को छू गई? कहानी वही है, पर आँसू आपके अपने हैं। यह जानना कि किसका डर, किसका अपमान, किसकी हार असल में मुझे हिला देती है, रुलाई को आत्म-परिचय का मौका बना देता है, वरना वह सिर्फ पर्दे पर बहकर खत्म हो जाती है। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















