
santosh kumar
जो लोग खाते है इसे अपना कल्चर बोलकर इन्हे प्रोमोट करते हैं और सरकारे और मिडिया हॉउसेस इन्हे सबसीडी एवं योजनाएं निकालती है, जिभ के स्वाद और पैसों के लिए तड़पा- तड़पा के मार डालते है, कितनी अजीब शर्त है न।
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जो लोग खाते है इसे अपना कल्चर बोलकर इन्हे प्रोमोट करते हैं और सरकारे और मिडिया हॉउसेस इन्हे सबसीडी एवं योजनाएं निकालती है, जिभ के स्वाद और पैसों के लिए तड़पा- तड़पा के मार डालते है, कितनी अजीब शर्त है न।
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