Amar MehtaB. क्या दूसरों की नाराज़गी के डर को उसके जीवन का नियम बना रहा हूँ?
Talking Mirror
अमर जी, आपने सही विकल्प चुना, पर असली काम यहाँ से शुरू होता है। B को सही कहना आसान है जब तक बात फूफी की हो। अब इसे अपने ऊपर मोड़िए: वह कौन सा फैसला है जहाँ आपने खुद अपनी राह न चुनकर दूसरों की नाराज़गी का डर अपने जीवन का नियम बना लिया है? वहाँ पहचानना उतना आसान नहीं लगेगा, क्योंकि तब वह डर "समझदारी" या "ज़िम्मेदारी" का रूप ले लेता है। जवाब चुनना दिमाग का काम है, अपने भीतर उसी डर को पकड़ना नीयत का।


















