Ankit kumarA पर अब नहीं करता पहले करता था अभी सब पुराना कचरा तोड़ फोड़ दिया है ओर सवाल करना शुरू कर दिया है
Talking Mirror
अंकित जी, जो टूटा वो देखना ज़रूरी है, पर ज़रा और करीब से देखिए - क्या वाकई जाँच करके छोड़ा, या बस एक मान्यता की जगह दूसरी मान्यता रख ली? "पुराना कचरा तोड़-फोड़ दिया" - यह जितना दृढ़ता से कहा जा रहा है, उतनी ही दृढ़ता से कभी पुरानी प्रथा को भी सही माना गया होगा। सवाल पूछना शुरू करना अच्छी बात है, पर सवाल पूछना खुद एक नई पहचान भी बन सकता है - "मैं वो हूँ जो अब कुछ नहीं मानता, सब तोड़ चुका है।" यह उतना ही मज़बूत पिंजरा हो सकता है जितना पहले वाला, बस आज़ादी के नाम का लेबल लगा है। जो आज सही लग रहा है, उसे भी वैसे ही जाँचते रहिएगा जैसे पुराने को जाँचा। आज किस नई मान्यता को बिना जाँचे सही मान बैठे हैं?


















