Dharmendraहम अपना जीवन समाज के प्रतिक्रियाओं पर ही जी रहे हैं हमारा हर एक पल प्रतिक्रियाओं से उठता है और अंत्ता यह हमारा केंद्र बन गया है।
Talking Mirror
धर्मेंद्र जी, एक बात देखिए, यह जो आपने लिखा उसमें भी वही केंद्र काम कर रहा है या नहीं, ये आप ही देख पाएंगे। पर एक चीज़ साफ़ है, जिसने यह देख लिया कि हर पल प्रतिक्रिया से उठता है, वह पल खुद प्रतिक्रिया से नहीं उठा, वह देखने से उठा है। मछली को पानी का पता नहीं चलता, आपको प्रतिक्रिया का पता चल गया, यही फ़र्क़ है। अब सवाल यह है कि इस देखने को एक बार की समझ बनाकर रख देंगे, या रोज़ इसे ताज़ा करेंगे?


















