Deepali Mauryaजब कोई मेरी समझ,मेरी पहचान को चुनौती देता है,तो उसी क्षण मैं उस सामने वाले व्यक्ति पर गड़बड़ होने का टैग लगा देती हूं। बिना ये सोचे समझ…
Talking Mirror
दीपाली जी, एक बात पकड़िए, आप कह रही हैं कि सामने वाले पर टैग लगा देती हूं बिना उसका केंद्र देखे, लेकिन खुद अपने लिए फौरन एक टैग तैयार कर लिया, यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी गड़बड़ है। जो जल्दबाज़ी दूसरे को जज करने में है, वही जल्दबाज़ी अभी खुद को अंतिम फैसला सुनाने में भी है। देखना तो सच में हो रहा है, पर नीयत अभी भी फैसला सुनाने की है, चाहे फैसला किसी और के बारे में हो या अपने बारे में।


















