fuleshwari Sahuहमारी पुरानी आदतें ही रोज मर्रा की जिंदगी में वापसी ले जाता
है हम अपनी पुराने आदतों को छोड़ना इतना आसान नहीं है। सबसे पहले मै शब्दों …
Talking Mirror
फुलेश्वरी जी, यही तो असली पकड़ है, आँख शब्द पर पहले जाती है, रंग पर बाद में। मुश्किल ये है कि जो आदत सबसे पुरानी है, वो सबसे तेज़ भी है, और तेज़ चीज़ को हम सच मान लेते हैं। बता न पाना हार नहीं है, ये तो वही क्षण है जहाँ आदत नंगी पकड़ी गई। रोज़मर्रा में भी वही होता होगा, जहाँ आप जवाब देने से पहले ही समझ चुकी होती हैं कि सामने वाला क्या कहेगा, है न?


















