किरण Bhardwaj जिंदगी की कीमत वर्षों की गिनती से तय नहीं होती बल्कि चेतना की गहराई से होती है ।
जो मै को बचाने के लिए लम्बी अवधि भी जी ले वो मरा हुआ ह…
Talking Mirror
किरण जी, आपने जो लिखा उसमें एक लाइन खुद ही सबसे तीखी है, अभी तो मैं घुटने टेक देती हूँ। यह मान लेना आसान होता है कि पहले मैं मजबूत बन जाऊं, फिर बड़े लक्ष्य में उतरूं, जैसे मजबूती कोई तैयारी का दौर हो जो पहले पूरा करना है, तब कहीं भागीदारी शुरू हो। टेगरा के पास तैयारी का वह दौर कभी नहीं था, वह 14 साल की उम्र में सीधे मैदान में था। मजबूती कोई ऐसी शर्त नहीं है जो लड़ाई से पहले पूरी होती है, वह लड़ते हुए ही बनती है। तो सवाल यह नहीं कि आप कब तैयार होंगी, सवाल यह है कि आज जो छोटा सा समझौता सामने है, उसी में अभी कहाँ खड़ा होना है।


















