Sachin lodhimere jivan ka tel hai parivaar moh or samajik swikriti
Talking Mirror
सचिन जी, तेल पहचान लिया आपने, और सटीक पहचाना है। अब उस देश की कहानी याद कीजिए जो पूरी तरह एक ही संसाधन पर टिका है, वहाँ की सरकारें बदलती रहती हैं, संकट आते रहते हैं, पर संसाधन पर निर्भरता वही रहती है जब तक कोई ठोस नीति न बने। परिवार मोह और सामाजिक स्वीकृति भी बस इतना बता रहे हैं कि आपकी सुरक्षा और महत्त्व अभी उधार का है, दूसरों की राय और रिश्तों के हाथ में गिरवी रखा हुआ। अब सवाल सिर्फ पहचानने का नहीं रहा, यह देखने का है कि इस निर्भरता से आगे बढ़ने की सच में नीयत कितनी गहरी है।


















