
मैं जब कक्षा आठवीं में था तब स्कूल शुरू होकर 2 महीने हो गए लेकिन इतिहास, भूगोल के शिक्षक हमे सिखाने नहीं आए थे इसका मतलब उनकी joining को देर थी। लेकिन एक दिन अचानक एक थोडासा सावला, जिसकी ऊंचाई कम थी वह हमारी क्लास में आया और कहने लगा में तुम्हे पढ़ाऊंगा। तब मैने मन ही मन उनको गालियां दी ये आदमी पढ़ाएगा? माने (अंहकार ने पहले से धरना बना ली थी शिक्षक के बारे में की शिक्षक गोरा होता है, साफ सूत्रे कपड़े पहनता है, इन करता है) लेकिन उनके कपड़े बिल्कुल साधारण थे। लेकिन जैसे ही उन्होंने पढ़ना शुरू किया बाप रे बाप! सब शिक्षकों में से उस वक्त वहीं अच्छे लगने लगे। क्योंकि उनके पाव जमीन पर थे वह सचमुच हमे सिखाना चाहतें थे। हमे बहुत ही जल्द किसी के दिखने के हिसाब से अनुमान लगाते है जो कि अक्सर झूठ होते है।


















