
Kamlesh Sharma
हम पहले से ही तय अर्थ को पहचानने लग जाते हैं! हम सचमुच किसी चीज़ को नही देखते , उसके मूल अर्थ को स्पष्ट रूप से नही देख पाते, क्योंकि अहंकार को पहले से बने बनाये रास्तों पर चलना आसान लगता है!
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हम पहले से ही तय अर्थ को पहचानने लग जाते हैं! हम सचमुच किसी चीज़ को नही देखते , उसके मूल अर्थ को स्पष्ट रूप से नही देख पाते, क्योंकि अहंकार को पहले से बने बनाये रास्तों पर चलना आसान लगता है!
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