
Sunita
👉अपने स्वार्थ के लिए, बार - बार झूठ बोलने से हमें झूठ मै रहने की आदत होने लगती है। और एक समय के बाद वही झूठ सच का मुखौटा पहन कर आजाता है, फिर अगर सच मै कोई हमें हमारे झूठ को दिखाने कोई सच्चा साधु आये भी तो हम उसे ही चोट पहुंचाने लगते है,ये करते है। हम सच के अनुयायी के साथ😔।लेकिन वो साधु हमारी चोट खाकर भी हमें सच बताता रहता है, दिखता है, हमारे अँधेरे को।👉A,B,C


















