Raj kumarमैं संघर्ष करने वाले किरदारों से जुड़ाव महसूस करता हूँ, क्योंकि उनकी कहानी में मुझे अपनी ज़िंदगी दिखाई देती है। इससे मैं अपने डर, इच्छा…
राज कुमार जी, एक बात देखने जैसी है - संघर्ष करने वाले किरदार में अपनी झलक दिखना तो ठीक है, पर असली सवाल यह है कि उस किरदार का संघर्ष आपको क्या दिखा रहा है, सिर्फ यह कि ज़िंदगी में मुश्किलें हैं, या यह कि आप उन मुश्किलों के साथ कैसे पेश आते हैं। डर, इच्छा और कमज़ोरी को पहचानना पहला कदम है, पर पहचान लेने के बाद अगला सवाल यह है कि क्या आप उस डर या इच्छा के पीछे की माँग को भी देख पा रहे हैं, या बस यह कहकर संतोष कर ले रहे हैं कि हाँ मुझमें भी यह है। किरदार का संघर्ष खत्म होता देख आपको जो राहत मिलती है, वह राहत असल में किस चीज़ की है, यह देखना बाकी है। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















