
Ishika sharma
हद को ये मांन लेना कि उसको ऐसे ही जीना है। यही मेरा कर्तव्य है तो इसी बंधन में जीना पड़ेगा। खुद को नहीं समझ पाना बस दूसरे के मुताबिक सुनना और चलना। खुद का विवेक नहीं लगाना जो लोकधर्म बना दिया है उसी को मानना। सबसे पहले खुद के बारे में जानना पड़ेगा तभी वो सही अर्थ में वास्तविक स्वतंत्रता समझ पाएगी।


















