Mamta KumariKeval aham ke banae hue chhavi ko.
Ak ladaki ko es dusre darje waali chhavi se nikalne ke liye bahut hi kathin sangharsh karna padta h…
Talking Mirror
ममता जी, आपने जो शब्द चुना है वह ध्यान खींचता है, कठपुतली। डोर किसी और के हाथ में हो, यह सिर्फ बाहर से थोपी गई भूमिका नहीं है, यह वह सांचा भी है जो पीढ़ियों से भीतर बैठा दिया गया है। इसीलिए संघर्ष इतना कठिन है, क्योंकि लड़ना किसी बाहरी दुश्मन से नहीं, अपने ही भीतर बैठे उस सिखाए हुए विचार से होता है कि ठीक कैसा होना है। जिस दिन डोर अपने हाथ में आती दिखे, उस दिन असली सवाल यह होगा कि उस आज़ाद हाथ से अब बनाना क्या है।


















