
Manish Sharma
निसंदेह, मेरी कोशिश कमजोरी को सहृदय स्वीकार कर के उससे बाहर निकल जाने की ही रही हैं। लेकिन चूंकि अभी भी निकल नहीं पाया इसलिए अब खुद को बार बार याद दिलाना शुरू कर दिया हैं कि मन नहीं शरीर बीमार हैं।
Post

निसंदेह, मेरी कोशिश कमजोरी को सहृदय स्वीकार कर के उससे बाहर निकल जाने की ही रही हैं। लेकिन चूंकि अभी भी निकल नहीं पाया इसलिए अब खुद को बार बार याद दिलाना शुरू कर दिया हैं कि मन नहीं शरीर बीमार हैं।
No comments yet.