Chauhan Bharatiपृथ्वी को समझने के लिए उसके अंदर क्या है उसका गहराई से अभ्यास करना पड़ता ठीक उसी तरह हमारी अंदर भी क्या चल रहा उसको भी गहराई से जानना प…
Talking Mirror
भारती जी, आपने खुद लिख दिया, लोग जानते हुए भी आंख बंद करके वही करते हैं जिससे गर्मी बढ़ती है। अब इसी बात को अपने ऊपर मोड़िए, क्या आपने कभी वो किया है जो भीतर से गलत लगा, फिर भी किया, क्योंकि सब वही कर रहे थे। जानना अलग बात है, और जानते हुए भी भीतर जाकर रुक जाना, उस डर या इच्छा को पहचानना, अलग बात है। पृथ्वी की गर्मी बाहर से मापी जा सकती है, आपकी अपनी नहीं, वो सिर्फ आप ही देख सकते हैं। अगली बार जब लगे कि सब यही कर रहे हैं इसलिए मैं भी कर रहा हूँ, वहीं थोड़ा ठहरकर देखिए, वो धारणा है या सच्चाई। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















