
SHUBHAM VISHWAKARMA
21 वर्ष का एक युवक : जवानी, फिर से दहाड़ती हुई । उपलब्धिया नहीं, बल्कि अभाव को भरने के लिए समर्पित। भूमिहीन किसान की दर्द: इलाज केंद्र बदलना(आंतरिक)। सद्भावना के साथ न्यायपूर्ण व्यवस्था और भी आवश्यक हैं। ✍️ मै भी यही करता हूँ, बोध पहुंचाने की ललक कम रहती है पर मेरे द्वारा बोध पहुँचे इसकी ललक ज्यादा रहती है। 🪞अब कभी भी कुछ मांग उठेगी तो खुद को यही याद दिलाऊंगा कि मांग उसी की होती है जो अपूर्ण है और यह मात्र अहंकार अपूर्ण हैं। 🪔अहंकार का अपना कोई आधार नहीं होता, इसलिए वह दूसरों की स्वीकृति, प्रशंसा और अच्छी छवि से अपनी पहचान उधार लेता है। ❤️ 🪞🪞🪞🪞🪞🪞🪞🪞🪞🪞🪞🪞🪞🪞🪞🪞❓ जब तुम्हें समाज में कोई कमी दिखाई देती है, तब अपनी नीयत को देखो। 🫵🫵🫵🫵🫵🫵🫵🫵🫵🫵🫵🫵🫵🫵🫵🫵


















