
Deepali Singh
ये तो बस हम तभी बोल सकते है जब हम करुणा के केंद्र से कुछ करे नहीं तो ऐसा बोलना संभव नहीं है चाहे जो रिश्ता हो
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ये तो बस हम तभी बोल सकते है जब हम करुणा के केंद्र से कुछ करे नहीं तो ऐसा बोलना संभव नहीं है चाहे जो रिश्ता हो
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