
Nitesh pal
आंसू आने पर हमको अपना केंद्र देखना चाहिए कि किस केंद्र से भावना के आंसू आ रहें हैं। यहीं से बोध का काम शुरू होता है यदि हमारे भीतर बोध है तो हम अपनी भावनाओं और छवियों को अच्छी तरह से जांच पाएंगे।
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आंसू आने पर हमको अपना केंद्र देखना चाहिए कि किस केंद्र से भावना के आंसू आ रहें हैं। यहीं से बोध का काम शुरू होता है यदि हमारे भीतर बोध है तो हम अपनी भावनाओं और छवियों को अच्छी तरह से जांच पाएंगे।
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