
शायद मेरे जीवन के ईथाका तक मै पहुंच ही नहीं पाई, आचार्य जी की स्टूडेंट होकर भी कुछ नहीं कर पा रही हु फेल हो गई , पहले मेरे मन में सवाल रहता था आचार्य जी इतनी अच्छी बाते बताते है लेकिन कई लोग सुनना क्यों नहीं चाहते। मुझे लगता है कई लोग इसलिए नहीं सुनते क्योंकि उन्हें लगता है अब सुन के क्या फायदा बता तो सही रहे है लेकिन हमारी जिंदगी में हम कुछ कर ही नहीं पाए अब सुन के भी क्या कर लेंगे रिग्रेट अलग होता है इसीलिए लोग दूर भागना लगते है सच से दुख होने लगता है ।लाख कोशिशों के बावजूद मुझे भी लगने लगा की मैं फेल हो गई। इतनी बाते सुनी आचार्य जी की लेकिन जो समाज में होते आ रहा वही मेरे साथ भी हो रहा मै कुछ नहीं कर पा रही मै एक अच्छी स्टूडेंट नहीं बन पाई शायद मेरे में ही कमी है आचार्य जी कहते है कोई मजबूर नहीं होता सही कहते है लेकिन मुझे मज़बूरी ही दिख रही मै हार नहीं मानी फिर भी सब गलत हो रहा । लगता है खुद कुछ नहीं कर पाई सत्र सुनकर अवलोकन में क्या लिखूंगी जो सुना वो कर ही नहीं पाई तो ।


















