
Lovely Singh
किसी धारणा को सही मान लेना और उसे प्रमाणों की कसौटी पर परखना, दोनों अलग बातें हैं। सच्ची जिज्ञासा वही है, जो अपनी मान्यताओं के गलत साबित होने की संभावना को भी स्वीकार करे। जब हमारा उद्देश्य सत्य जानना होता है, तब हम प्रमाणों से सीखते हैं; लेकिन जब उद्देश्य केवल स्वयं को सही साबित करना होता है, तब हम सत्य के बजाय अपनी धारणा की रक्षा करने लगते हैं। इसलिए किसी बात को केवल इसलिए सही नहीं मानना चाहिए कि हम उस पर विश्वास करते हैं, बल्कि उसे तर्क, प्रमाण और निष्पक्ष जाँच की कसौटी पर परखना चाहिए।


















