
1. AP फ्रेमवर्क चेतना को कैसे परिभाषित करता है? अपने शब्दों में लिखिए। चेतना द्वैतवाद पर चलता है जहां है एक चोर पर दृष्टा और एक चोर पर दृश्य होता है ,शुद्ध चेतना जैसा कुछ नहीं होता ये भी अहंकार की एक चाल होती है अपने संरक्षण के लिए , हमेशा एक चोर अहंकार रहेगा बरना वो वस्तु को देखेगा कौन । 2. तंत्रिका विज्ञान (Neuroscience) चेतना को कैसे परिभाषित करता है और ये AP फ्रेमवर्क से कैसे अलग है? तंत्रिका विज्ञान (Neuroscience) चेतना को मस्तिष्क की जैविक और विद्युत-रासायनिक (electrochemical) प्रक्रियाओं के एकीकरण के रूप में परिभाषित करता है, जहाँ लगभग 86 अरब न्यूरॉन्स का जटिल नेटवर्क आपस में मिलकर 'मैं' होने का और बाहरी दुनिया का सचेत अनुभव (Subjective Awareness) पैदा करता है। ये एक चोर पर मस्तिक को रख रहा है लेकिन फ्रेमवर्क एक चोर पर अहंकार होगा ही होगा । 3. आचार्य जी के अनुसार स्वतंत्र इच्छा (Free Will) क्या है? अपने जीवन से कुछ उदाहरण दीजिए जहाँ आपको लगता आप स्वतंत्र इच्छा का पालन करते हैं, क्या वाकई स्वंतंत्र होतीं हैं। में घर पे विद्रोह करने का चुनाव किया ये में किसीसे सीखी नहीं ये मेरी बोध से उठी है ,आचार्य जी को सुनना मेरी फ्रीविल है , जो मेरे बोध से उठे वो स्वतंत्रता ऊचाई मेरी। 4. कल के बोध प्रत्युषा सत्र में आचार्य जी ने कहा कि अहंकार भी नहीं, बल्कि ‘दुख’ मौलिक होता है। आप इससे क्या समझे? संक्षिप्त में लिखिए। धर्म कभी होता ही नहीं अगर मनुष्य को दुख नहीं होता , इसलिए दुख मौलिक है।


















