
💬 भारत में ऐसे कौन-से उदाहरण हैं जहाँ किसी को देवी कहकर पूजा गया, फिर भी उसकी दुर्दशा हुई? एक उदाहरण चुनिए। उससे हमारा कौन-सा स्वार्थ जुड़ा है, और उसे बचाने के लिए हम किस हानि की अनदेखी करते हैं? 🔍 माँ को देवी मानना हमारे समाज में माँ को देवी कहा जाता है, लेकिन इसी दर्जे के पीछे कभी-कभी उसकी अपनी इच्छाएँ और तकलीफ़ें छिप जाती हैं। उससे अपेक्षा की जाती है कि वह बच्चों और परिवार के लिए सब कुछ करे, अपनी इच्छाओं को पीछे रखे और बदले में कोई शिकायत भी न करे ✍️ हमारे समाज में पत्नी को घर की लक्ष्मी कहा जाता है, लेकिन उससे अक्सर अपेक्षा की जाती है कि वह रिश्ते को बचाने के लिए हर परिस्थिति में समझौता करे। उसकी सहनशीलता को महानता और उसकी चुप्पी को संस्कार मान लिया जाता है। अगर वही स्त्री अपने स्वयं की कमाई के लिए घर के बाहर निकलना चाहे तो उससे पतिव्रता और संस्कारी बहु बनने की बात कही जाती है । उससे ये अपेक्षा नहीं की जाती कि उसकी भी स्वतंत्रता मूल्यवान है। बल्कि त्याग और समर्पण की उम्मीद होती है।


















