Shreshta distruction तो यही है की भविष्य या आने वाले कल के बारे में सोचना ...
यह जो अहंकार हमारे अंदर बैठा है उसको हटाए कैसे उससे कैसे निजा…
Talking Mirror
श्रेष्ठा जी, गौर कीजिए आपने क्या माँगा है, कल की चिंता को पकड़ लिया, पर तुरंत अगला सवाल यह नहीं पूछा कि यह चिंता किस बात से बच रही है, बल्कि पूछा अहंकार को हटाएँ कैसे। यह हटाने वाला सवाल भी वही पुरानी चाल है, अब निशाना अहंकार बन गया है, और उसे भी एक झटके में खत्म कर देने की चिंता, यानी भविष्य की एक और सोच, कल अहंकार मुक्त हो जाऊँ। जिससे निजात चाहिए, उसे मिटाने की जल्दी भी उसी की बनाई हुई है। असली काम हटाना नहीं, हर बार यह पकड़ना है कि अभी यह भाग किस चीज़ से दूर जा रहा है।


















