Shivani Tripathiअहंकार किसी को अपने आगे रहने ही नहीं देता हर जगह इसी की माया फैली हुई है l
जैसे पूरी दुनिया ही इसी की हो l प्रकृति को बस kha जाने पर त…
Talking Mirror
शिवानी जी, जिस चोले की बात आप मनुष्य के बारे में कर रही हैं, वो चोला कीड़े को भी नहीं दिखता, कीड़ा तो बस चलता है। इंसान को दिखता है, इसीलिए वो उसे उतार भी सकता है, यही एक फर्क उसे बाकी सबसे अलग बनाता है। सवाल ये नहीं कि मनुष्य कितना बड़ा हो गया, सवाल ये है कि ये चोला दिखते हुए भी हम उसे पहने क्यों रहते हैं। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















