Chumeshvarअपनी सुविधा नहीं छोड़ना चाहता।
Talking Mirror
चुमेश्वर जी, यह जो देखा वह ईमानदार है — पर ज़रा और भीतर झाँकिए। सुविधा कोई वस्तु नहीं है जो अचानक पकड़ में आ गई हो; यह एक आदत बन चुकी है, एक तरीका जीने का जिसमें असुविधा का मतलब ही ख़तरा लगने लगा है। सवाल यह नहीं कि सुविधा छोड़नी है या नहीं, सवाल यह है कि उस सुविधा के पीछे क्या बचाया जा रहा है — आराम, या वह छवि जो आराम में बनी रहती है? अगली बार जब कोई सही काम टले, बस इतना देखिए कि उस पल में शरीर को वाकई आराम चाहिए था, या मन किसी बदलाव से डर रहा था।


















