
Shashi Bhushan
हद तब होता है जब हम किसी जीति जागती जीवन को वस्तु बना देते हैं और यही हाल कोई दूसरा हमारे साथ करता है तो हम उसे हिंसा, क्रुरता कहते हैं।
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हद तब होता है जब हम किसी जीति जागती जीवन को वस्तु बना देते हैं और यही हाल कोई दूसरा हमारे साथ करता है तो हम उसे हिंसा, क्रुरता कहते हैं।
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