
💫AP फ्रेमवर्क के अनुसार चेतना कोई बाहर की वस्तु नहीं, बल्कि द्रष्टा और उसके अनुभव के बीच का संबंध है। विज्ञान चेतना को मस्तिष्क की जैविक प्रक्रिया मानकर उसका अध्ययन करता है, जबकि AP में स्वयं उस ‘मैं’ को देखा जाता है जो अनुभव कर रहा है। ✳️‼️स्वतंत्र इच्छा भी पूरी तरह स्वतंत्र नहीं है, क्योंकि हमारे अधिकतर निर्णय डर, इच्छाओं, आदतों और अहंकार से निकलते हैं। जैसे मैं पढ़ाई या फोन में से कुछ चुनती हूँ, लेकिन कई बार मेरा चुनाव मेरी आदत और मन की इच्छा से तय होता है। वास्तविक स्वतंत्रता तब है जब अहंकार अपनी ही मजबूरियों को देखकर उनसे मुक्त होने का चुनाव करे। ‘💫✳️दुख’ को मौलिक कहने का अर्थ है कि हमारे भीतर सबसे पहले दुख का अनुभव है और अहंकार उसी दुख से बचने के लिए अपनी पहचान, इच्छाएँ और कहानियाँ बनाता है। इसलिए दुख को समझना ही अहंकार को समझने की दिशा है।


















