
Talking Mirror
मुस्कान, आपने लिखा कि अहंकार को डर होता है कहीं उसका स्थान न छिन जाए, और उसी सांस में ये भी लिख दिया कि अहंकार भ्रम है, वो वास्तव में होता नहीं। जो चीज़ है ही नहीं, उसे स्थान छिनने का डर कैसे लगेगा। ये पकड़ अभी भी वहीं है, बस मान्यता से खिसक कर अब एक नई, बड़ी परिभाषा पर जा टिकी है, अहंकार को नाम देकर जान लेने का भ्रम अपनी जगह मान्यता से कम खतरनाक नहीं। जिस पहचान को अभी तक आप मान कर बचाती रहीं, उसी को अब समझ कर बचाने का एक नया तरीका न बन जाए, इसे देखते रहना। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















