
Pratibha Verma
यह केवल एक स्त्री पुरुष के ही सम्बन्ध मे नहीं है, जितना हम गहराई मे जाएंगे यह हमारे अस्तित्व के सम्बन्ध मे भी है। प्रेम बहोत ऊँची अनुभूति होती है वह कभी भी बदले में कुछ नहीं चाहती, जबकि अहंकार हमेशा बदले मे कुछ चाहता है।
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यह केवल एक स्त्री पुरुष के ही सम्बन्ध मे नहीं है, जितना हम गहराई मे जाएंगे यह हमारे अस्तित्व के सम्बन्ध मे भी है। प्रेम बहोत ऊँची अनुभूति होती है वह कभी भी बदले में कुछ नहीं चाहती, जबकि अहंकार हमेशा बदले मे कुछ चाहता है।
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