
Lovely Singh
किसी सुविधा या काम का बन जाना ही उसकी सफलता नहीं है। असली सफलता उसे लगातार सही तरीके से निभाने और उसकी जिम्मेदारी लेने में है। आपके बोधकार्य के लिए इसे अपने शब्दों में ऐसे लिख सकती हैं: मेरे जीवन में भी कई बार ऐसा हुआ है कि मैंने किसी काम की शुरुआत को ही उपलब्धि मान लिया। लेकिन बाद में समझ आया कि किसी चीज़ को शुरू करना आसान है, उसे रोज़ निभाना और उसकी जिम्मेदारी लेना मुश्किल है। जैसे स्कूल में शौचालय बन जाना पर्याप्त नहीं, उसका साफ़ और उपयोगी रहना भी जरूरी है। उसी तरह जीवन में कोई संकल्प, आदत या बदलाव तभी वास्तविक है, जब मैं उसे लगातार अपने कर्मों में उतारूँ। सिर्फ़ “हो गया” मान लेने से बदलाव नहीं आता।


















